काफी पढ़े लिखे हो तुम
कभी वो भी पढ़ो
जो कागज की भित्ती पर
हम लिख नहीं पाते हैं
कभी वो भी सुनो
जो पलकों के पीछे से
नयन बोल जाते है
कभी वो भी सुनो
जो एक अन्तरंग संगीत है
जिसे मेरा पोर पोर गुनगुनाता है
अभी तक तुमने पढ़ा कि नहीं
जो मेरे मन का प्रशान्त सागर है
इसकी सीपियों में यादों के मोती हैं
जिसमें तुम ही तुम हो!