Thursday, 17 July 2025

अंकुर क्या गाता है

अंकुर क्या गाता है

ओ पीपर के पीत पात
तेरे जीवन की व्यथा कथा
कैसे जग का क्षीर-सिन्धु
तूने पौरुष से रोज मथा
    नव अंकुर अपने आँसू से
    वह अकथ कथानक लिखता है

कितने प्रलयंकर झंझा के
तू क्रूर कोप से काँप था
फिर भी जीवन का मूल सत्व
तूने प्रहरी बन ढाँपा था
   नव अंकुर बन कर हरबोला
   विरुदावलि तेरी कहता है

विषबुझी पवन को पी-पी कर
फिर भी तन से अमिय बहा
जकड़न को निष्ठुर शीतों में
मन-प्राणों ने किस तरह सहा
   नव अंकुर तेरी पुण्य कथा 
   जग में गा कर बललाता है 

       रामनारायण सोनी

        १८.७.२५ 

    

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